Wednesday, September 23, 2009

भगवतीक गीत (जगदम्ब अहिं अवलम्ब)



भगवतीक गीत


जगदम्ब अहिं अवलम्ब हमर
हे माय अहाँ बिनु आस ककर । ....२

जँ माय हमर दुःख नय सुनबय
त जाय कहु ककरा कहबय
अछि पुत्र अहिंक बनल टुगर
हे माय अहाँ बिनु आस ककर
जगदम्ब अहिं .................. ।

हम भरि जग सँ ठुकरायल छी
माँ अहिंक शरण में आयल छी ।
करू माफ़ जननि अपराध हमर ,
हे माय अहाँ बिनु आस ककर ।
जगदम्ब अहिं ................... ।

काली लक्ष्मी कल्याणी छी ,
दुर्गे तारा ब्रम्हाणी छी ,
अछि बीच भ्रमर में नाव हमर
हे माय अहाँ बिनु आस ककर ।
जगदम्ब अहिं ..................... ।




Friday, September 18, 2009

क्षमा - प्रार्थना (अपराध सहस्राणि)

माँ दुर्गा


अपराध सहस्राणि क्रियन्तेsहर्निशं मया ।
दासोsयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरी ।।
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम् ।
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वरी ।।
मंत्रहींनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरी ।
यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे ।।
अपराधशतं कृत्वा जगदम्बेति चोच्चरेत ।
यां गतिं समवाप्नोति न तां ब्रम्हादयः सुराः ।।
सापराधोsस्मि शरणं प्राप्तस्त्वां जगदम्बिके ।
इदानीमनुकम्प्योsहं यथे च्छसि तथा कुरु ।।
अज्ञानाद्विस्मृतेर्भ्रान्त्या यन्न्यूनमधिकं कृतम् ।
तत्सर्वं क्षम्यतां देवि प्रसीद परमेश्वरी ।।
कामेश्वरी जगन्मातः सच्चिदानन्दविग्रहे ।
गृहाणार्चामिमां प्रीत्या प्रसीद परमेश्वरि ।।
गुह्यातीगुह्यगोप्त्री त्वं गृहाणास्मत्कृतं जपम् ।
सिद्धिर्भवतु मे देवि त्वत्प्रसादात्सुरेश्वरी ।।

Thursday, September 17, 2009

श्री भगवती स्तोत्रम् (जय भगवती देवी नमो)



जय भगवती देवी नमो वरदे, जय पापविनाशिनी बहुफलदे ।
जय शुम्भनिशुम्भकपालधरे, प्रणमामि तु देवी नरात्रि हरे ।।
जय चन्द्र दिवाकरनेत्रधरे, जय पावक भूषितवक्त्रवरे ।
जय भैरव देह निलीनपरे, जय अन्धकदैत्यविशोषकरे ।।
जय महिषविमर्दिनी शूलकरे, जय लोकसमस्तकपापहरे ।
जय देवी पितामहविष्णुनते, जय सागरगामिनि शम्भुनुते ।
जय दुःखदरिद्रविनाशकरे, जय पुत्रकलत्रविवृद्धिकरे ।।
जय देवी समस्तशरीरधरे, जय नाकविदर्शिनि दुःखहरे ।
जय व्याधिविनाशिनि मोक्ष करे, जय वाञ्छितदायिनि सिद्धिवरे ।।
एत द्व्यासकृतं स्तोत्रं यः पठेन्नियतः शुचिः ।
गृहे वा शुद्ध भावेन प्रीता भगवती सदा ।।
 
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