Wednesday, September 23, 2009

भगवतीक गीत (जगदम्ब अहिं अवलम्ब)



भगवतीक गीत


जगदम्ब अहिं अवलम्ब हमर
हे माय अहाँ बिनु आस ककर । ....२

जँ माय हमर दुःख नय सुनबय
त जाय कहु ककरा कहबय
अछि पुत्र अहिंक बनल टुगर
हे माय अहाँ बिनु आस ककर
जगदम्ब अहिं .................. ।

हम भरि जग सँ ठुकरायल छी
माँ अहिंक शरण में आयल छी ।
करू माफ़ जननि अपराध हमर ,
हे माय अहाँ बिनु आस ककर ।
जगदम्ब अहिं ................... ।

काली लक्ष्मी कल्याणी छी ,
दुर्गे तारा ब्रम्हाणी छी ,
अछि बीच भ्रमर में नाव हमर
हे माय अहाँ बिनु आस ककर ।
जगदम्ब अहिं ..................... ।




4 comments:

समयचक्र - महेंद्र मिश्र said...

माँ भगवती के बारे में उम्दा भजन रचना...

Mithilesh dubey said...

बहुत ही उम्दा रचना।

sushant jha said...

नोस्टेल्जिक कय देलक...

Suman said...

thik hai

 
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