Friday, February 25, 2011

अब दर्शन दे दो हे महेश्वर


"अब दर्शन दे दो हे महेश्वर"

शंकर शम्भो तेरी महिमा,
गाऊँ निश दिन हे नटनागर 

बीच भ्रमर में नाव डूबत है 
पार लगा दो हे प्रलयंकर  

तीनो लोक चरण में तेरे 
शरण में आई हे परमेश्वर 

रूद्र रूप हो, सर्वसंघारी
नतमस्तक हूँ हे चंद्रशेखर     

आस लगाए बैठी कब से 
अब दर्शन दे दो हे महेश्वर

-कुसुम ठाकुर-


Wednesday, February 16, 2011

माँ सरस्वती (Goddess Saraswati)

देवी सरस्वती
या कुंदेंदु तुषार हार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता |
या वीणावरदंड मंडितकरा या श्वेतपद्मासना || 
Salutations to the supreme Goddess Saraswati whose face is fair as a jasmine flower, luminiscient like the moon and delicate as a snow flake ; who is dressed in radiant white garments . She holds the musical instrument  called veena  in her hands to bestow boons to her disciples as she sits on her white  lotus .





Thursday, February 3, 2011

माधव कत तोर करब बड़ाई.


"कवि कोकिल विद्यापति"

माधव कत तोर करब  बड़ाई
उपमा तोहर कहब ककरा हम, कहितहुं अधिक लजाई 
जओं सिरिखंड सौरभ अति दुर्लभ, तओं पुनि काठ कठोरे 
जओं जगदीस निसाकर, तओं पुनि एकहि पच्छ इजोरे 
मनिक समान आन नहि दोसर, तनिक पाथर नामे 
कनक सरिस एक तोहिं माधव, मन होइछ अनुमाने 
सज्जन जन सओं नेह कठिन थिक, कवि विद्यापति भाने


उपरोक्त पक्तियों में कवि विद्यापति कहते हैं .....हे श्री कृष्ण मैं आपका गुणगान कैसे करूँ, आपकी तुलना किससे करूँ. मुझे तो तुलना करने में भी संकोच हो रहा है . यदि आपकी तुलना दुर्लभ श्री खंड से करता हूँ तो दूसरी तरफ वह कठोर भी तो है. यदि आपकी तुलना दुनिया को रोशनी से उजाला करने वाले चन्द्रमा से करता हूँ तो वह भी तो मात्र एक ही पक्ष के लिए होता है. मणि-माणिक्य से दामी एवम सुन्दर दूसरा कुछ नहीं होता, पर आखिर है तो पत्थर ही. उससे आपकी तुलना कैसे करूँ ? सोना के समान दमकते हुए केला से भी आपकी तुलना नहीं की जा सकती वह भी आपके आगे बहुत छोटा पड़ जाता है. मेरा अनुमान बिल्कुल सही है आपके समान दूसरा कोई नहीं है. कवि विद्यापति कहते हैं सज्जन अर्थात महान व्यक्ति से नेह जोड़ना बहुत ही कठिन है.

Wednesday, February 2, 2011

देवाधि देव शंकर !


"देवाधि देव शंकर"

देवाधि देव शंकर, कर में  त्रिशूल धारी,
आ जाओ हे मृत्युंजय, भव पाप नाश हारी।  

गले रूद्र माल साजय शशि भाल पै विराजे, 
भव पाप नाशिनी माँ, गंगे है सर पे गाजे।  

त्रय लोक के हो स्वामी तन पे भुजंग धारी,
आ जाओ हे मृत्युंजय भव पाप नाश हारी। 
देवाधि देव शंकर .............................। 

Tuesday, February 1, 2011

सूर्य देवता (God Sun)

ॐ सूर्याय नमः - हिन्दुओं में सूर्य देव को  प्रज्ञता और श्रेष्ठता के स्वामी माना जाता है | सूर्य देव को शिव और विष्णु का प्रतिरूप माना गया है| एक ओर जहाँ इन्हें सूर्य नारायण भी बुलाया जाता है वहीँ
 इन्हें अष्टमूर्ति शिव के आठ रूपों में से एक माना गया है|
 
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