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Tuesday, June 9, 2026

वर दे, वीणावादिनि वर दे

 



वर दे, वीणावादिनि वर दे ।

प्रिय स्वतंत्र रव, अमृत मंत्र नव
भारत में भर दे ।
वीणावादिनि वर दे ॥

काट अंध उर के बंधन स्तर
बहा जननि ज्योतिर्मय निर्झर
कलुष भेद तम हर प्रकाश भर
जगमग जग कर दे ।
वर दे, वीणावादिनि वर दे ॥

नव गति, नव लय, ताल छंद नव
नवल कंठ, नव जलद मन्द्र रव
नव नभ के नव विहग वृंद को,
नव पर नव स्वर दे ।
वर दे, वीणावादिनि वर दे ॥

वर दे, वीणावादिनि वर दे।
प्रिय स्वतंत्र रव, अमृत मंत्र नव
भारत में भर दे ।
वीणावादिनि वर दे ॥
- सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
 
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